
जुखाला (बिलासपुर)। गुरुकुलों में गुरु ही नहीं है तो परीक्षा परिणाम की क्या उम्मीद की जा सकती है। जी हां, बिना शिक्षक कई स्कूलों का परीक्षा परिणाम काफी गिर गया है। सीनियर सेकेंडरी स्कूल जुखाला को ही लें तो यहां का परीक्षा परिणाम महज चौंकाने वाला है। दसवीं कक्षा में यहां सिर्फ 33 प्रतिशत बच्चे उत्तीर्ण हुए, इनमें से कइयों को कंपांर्टमेंट है। इस पर अभिभावक भड़क गए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों की कमी की वजह से स्कूल में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। दो साल से यहां शिक्षकों की तैनाती नहीं हो रही। जिस वजह से परीक्षा परिणाम बिगड़ गया है। जुखाला स्कूल में जमा एक और दो की कक्षा में करीब 250 विद्यार्थी है। हैरत है कि 250 विद्यार्थियों को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए महज एक ही शिक्षक की तैनाती की गई है। स्कूल में कला अध्यापक के दो, शास्त्री का एक, पीईटी का एक पद खाली है। इसके अलावा कई पदों पर नियुक्तियां नहंी हो रही। इस साल साल का परीक्षा परिणाम देखे तो यहां पर दसवीं का परीक्षा परिणाम 33 प्रतिशत रहा। वाणिज्य का 40 और आर्ट्स का महज 59 प्रतिशत। इससे अभिभावकों में भारी रोड़ है। एसएमसी के प्रधान संजीव कुमार, करतार ठाकुर, देश राज, छोटा राम, हरि राम धीमान, पंचायत प्रधान प्यारे लाल, उपप्रधान गोपाल ने कहा कि शिक्षकों की कमी की वजह से परीक्षा परिणाम गड़बड़ हो गया है। लिहाजा, सरकार को यहां जल्द से जल्द स्टाफ की नियुक्ति करनी चाहिए। एक-एक अध्यापकों पर कई कक्षाओं का बोझ है। इस वजह से शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। उधर, शिक्षा उप निदेशक एलीमेंटरी प्रीतम सिंह ढडवालिया और सकेंडरी बीर सिंह ने कहा कि स्टाफ की कमी बारे आला अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। भविष्य में जब भी शिक्षकों के पद भरे जाएंगे तो जुखाला स्कूल का प्राथमिकता दी जाएगी।
